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October 27, 2020
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भारत – चीन पर ग्लोबल मंदी का नहीं पड़ेगा असर, वैश्विक अर्थव्यवस्था को करना होगा मंदी का सामना

economy crisis after coron virus

बिजनेस। कोरोना वायरस का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। कोरोना वायरस ने अर्थव्यवस्था को जिस तरह से नुक्सान पहुंचाया है, उससे वैश्विक मंदी (Economy crisis after coron virus) की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस बाबत संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान जारी करते हुए कहा – कोरोना वायरस की वजह से ग्लोबल मंदी का सामना करना पड़ेगा। विकासशील देशों को सबसे ज़्यादा मुश्किलें झेलनी पड़ेगी। हालांकि इस वैश्विक मंदी से भारत तथा चीन बचे रहेंगे। इसके बाद भारत और चीन के मंदी से बचने की कई वजहें भी बतायी। जिसमे कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने के शुरूआती स्टेज में ही पुरे देश में लॉकडाउन लागू करने का फैसला मुख्य है।

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संयुक्त राष्ट्र की ट्रेड रिपोर्ट में बताया गया है, की कोरोना वायरस की वजह से विकासशील देशों को आर्थिक रूप से सबसे ज़्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। हो सकता है इन्हे बहुत ज़्यादा नुकसान भी उठाना पड़ जाए। ग्लोबल मंदी का सामना करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 187।50 लाख करोड़ रुपए की रेस्क्यू पैकेज की जरुरत बतायी है।

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Economy crisis after coron virus

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा, की भारत ने कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने के शुरूआती दौर में ही पुरे देश में लॉकडाउन लागू कर दिया। भारत के इस कदम ने कम्युनिटी के जरिये कोरोना वायरस के फैलने की संभावना को रोक दिया। हालांकि आर्थिक नुकसान से बचने के लिए अमेरिका समेत कई देश लॉकडाउन जैसा कडा कदम उठाने से परहेज करते रहे। जिसकी वजह से उनके यहां कोरोना वायरस ने विकराल रूप धारण कर लिया। कोरोना वायरस की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था भी ठहर सी गयी है। लेकिन भारत ने कोरोना के फैलने की गति को थाम लिया है। नए मामले अब भी सामने आ रहे हैं, लेकिन वह अभी भी स्टेज 2 में ही बना हुआ है।

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रिपोर्ट में आगे बताया गया है, की भारत की पर्यावरण सिस्टम काफी बेहतर होने की वजह से भी भारत को फायदा पहुंचा। बीसीजी वैक्सीन का जिन देशों ने भी इस्तेमाल किया है, उनकी रोग प्रतिरोधी क्षमता औरों के मुकाबले मजबूत है। भारत में यह अनिवार्य है। साथ ही सरकार और आरबीआई ने जो राहत पैकेज की घोषणा की है। वह कोरोना वायरस से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई करने में काफी मददगार साबित होगी। हालांकि कोरोना की वजह से विश्व में गरीबों की संख्या काम होने की जगह उसमे बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसकी आशंका वर्ल्ड बैंक ने जताई है।

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